आखिर हरिओम के अतिक्रमण को निगम का संरक्षण क्यो....?
शिकायत के बाद भी कार्यवाही नहीं क्यों...?
अवैध अतिक्रमण के बदले नेताओं को क्या लाभ....?
अतिक्रमण में नेताओं और अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध...?
हर वार्ड में नेताओं के अतिक्रमण पर कार्यवाही आखिर कब....?
रायगढ़ नगर निगम में बहुत दिनों से पदस्थ कर्मचारियों की सरपरस्ती में हमेशा से बीच शहर में पैसे वालों को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करवाने का पुरजोर समर्थन करते रहे है। और बही सबसे ज्यादा चक्रधर नगर क्षेत्र में नेताओं एवं कुछ नगर निगम में बहुत दिनों से पदस्थ कर्मचारियों के संरक्षण में भारी पैमाने पर अवैध कब्जे हुए है ऐसा नही की यह अवैध कब्जे बिना किसी स्वर्थसिद्धि के पूर्ण हुआ है इसके बदले निगम के कुछ कर्मचारियों ने मोटी रकम भी ली होगी।
सबसे ताजा उदाहरण हरिओम अग्रवाल का सामने आ रहा है जिसके द्वारा नगर निगम काम्प्लेक्स से जोड़कर एक पक्के मकान एवं दुकान का निर्माण बेधड़क किया जा रहा है और इसकी शिकायत भी नगर निगम रायगढ़ में दर्ज है लेकिन इस अतिक्रमण पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही नही की जा रही है इसका मतलब साफ है कि निगम के अधिकारी और कर्मचारी हरिओम अग्रवाल से डरते है या फिर मामला कुछ और ही होगा जो आज के समय मे जग जाहिर है।
सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के नेताओं की भूमिका संदिग्ध....?
शिकायतकर्ता की माने तो हरिओम के द्वारा जिस जमीन पर बिना किसी वैध दस्तावेज के अतिक्रमण हो रहा है वह जमीन शासकीय है और भाजपा के कद्दावर पार्षद का वार्ड है लेकिन नगर निगम में वर्तमान में कांग्रेस की सरकार है और सूत्रों की माने तो कांग्रेस के ही एक कद्दावर नेता के करीबी माने जाते है हरिओम अग्रवाल ऐसे में सवाल यह उठता की क्या दोनों पार्टियों के नेता हरिओम अग्रवाल के किस अहसानो तले दबे है जो शहर के बीचों बीच अतिक्रमण पर चुप्पी साधे बैठे है। कहीं ऐसा तो नही की निगम के दोनों पार्टियों के कद्दावर नेता सिर्फ और सिर्फ वोटबैंक की राजनीति करते है चाहे कुछ भी हो.......कम नही होना चाहिए।