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कैपिटल छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क....
संवाददाता :- दीपक गुप्ता....✍️
सूरजपुर :- जिला मुख्यालय से 40 किमी दुर भैयाथान - प्रतापपुर मार्ग पर स्थित सारसोर मे महाशिवरात्रि के पर्व पर शिव भक्तों का तांता लगा रहा जहा आज विशाल मेला लगा रहा वही पुलिस प्रशासन की चुस्त दुरुस्त व्यवस्था भी रही आज तमाम धार्मिक स्थलों सहित जिले के विभिन्न शिव मंदिरों में लोग भगवान शिव को आराध्य मानकर उनकी पूजा - आराधना करते नजर आये इसी शुभ अवसर पर आईये जानते हैं धार्मिक व पर्यटक स्थल सारासोर के प्राचीन इतिहास के बारें मे !
टापू पर है अनोखा मंदिर, यहीं से जाता है पाताल लोक का रास्ता, पूजे जाते हैं भोलेनाथ, राम-सीता से भी नाता है । सूरजपुर जिले में कई प्राचीन और धार्मिक कई स्थल है जहां आज भी लोगों कि मान्यताओं के साथ कई रहस्य इन स्थलों के आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं. ऐसा ही एक प्राचिन धार्मिक स्थल है सारासोर धाम, जहां कि मान्यताएं और रहस्य सालों से बरकरार है. इस जगह का भगवान राम लक्ष्मण और माता सीता से भी गहरा नाता है । प्राकृतिक सौंदर्यता और विशाल पहाड़ों के बीच बसा प्राचीन सारासोर धाम श्रद्धालुओं के अटूट आस्था का केंद्र है
सूरजपुर जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी की दूरी पर भैयाथान - प्रतापपुर मार्ग पर यह धाम स्थित है इस धाम से जुड़ी कई मान्यताएं लोगों के बीच प्रचलित है. यहां छोटी-छोटी नदियों से मिलकर बने महान नदी के बीच एक टापू पर भोलेनाथ और माता सतलोकी देवी का मंदिर स्थित है । लोगों के बीच मान्यता है कि प्राचीन काल में मंदिर के नीचे पानी के रास्ते जाकर बैगा पुजारी पाताल लोक में देवी मां का पूजा किया करते थे. एक बार पाताल लोक में पूजा करने के दौरान बैगा का तलवार वहां छूट गया था. जब बैगा उसे वापस लेने गया तब देवी मां नाराज हो गईं और पाताल लोक में आने से मना कर दिया. इसके बाद से ही नदी के ऊपर ही भोलेनाथ का मंदिर बनाकर पूजा किया जाने लगा । पुजारी बताते हैं कि कि सालों से यहां की मान्यताएं चली आ रही हैं
वहीं श्रद्धालुओं का कहना है कि सरासोर धाम की मान्यता और कहानी पूर्वजों से सुनते आ रहे हैं उनका मानना है कि यहां श्रद्धालू जो भी मन्नत मांगते हैं वो पूरी हो जाती है । मान्यताओं के अनुसार पहाड़ों के बीच बसे सारासोर स्थित पाताल लोक का मार्ग इसी स्थान पर है जिसकी गहराई आज तक कोई नहीं नाप सका ऐसे में इस स्थान का पानी भारी गर्मी में भी नहीं सूखता भूगोल वैज्ञानिकों का मानना है कि विज्ञान और आस्था अलग चीज है सारासोर स्थित नदी की गहराई को नापने से लेकर यहां के मान्यताओं पर कई शोधकर्ता दूसरे जिलों से आकर शोध कर रहे हैं । सारासोर धार्मिक स्थल से ही राम वन गमन पथ का मार्ग है भगवान राम, लक्ष्मण और सीता माता वनवास के दौरान इसी स्थान पर रुक कर विश्राम भी किया था ऐसे में यहा के स्थानीय लोगों का मानना है कि राम भगवान इस स्थल को सरोवर जलाशय बनाना चाहते थे, लेकिन यहां के मूल निवासी नहीं चाहते थे कि यहां सरोवर बने सरोवर बनने से यह जगह डूब जाती यहां के लोगो को बेघर होने का डर था, इसलिए भोलेनाथ की पूजा करने के बाद नाग देवता ने दो पहाड़ों को तोड़कर अलग कर दिया इसके बाद यहां सरोवर नहीं बन सका ।