रायगढ़ में कांग्रेस का दोहरा चरित्र क्यों...? जिंदल के गेस्ट हाउस में पर्यवेक्षक...?

रायगढ़ में कांग्रेस का दोहरा चरित्र क्यों...? जिंदल के गेस्ट हाउस में पर्यवेक्षक...?

रायगढ़ - रायगढ़ में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण के कारण क्षेत्र की जनता अब किसी भी जनसुनवाई का विरोध करने का मन बना ली है इसलिए 14 तारीख को होने वाली जिंदल की जनसुनवाई का विरोध रायगढ़ युवा कांग्रेस के द्वारा किया जा रहा है जिसका सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिला जिसमें जिंदल की जनसुनवाई निरस्त की गई।

इन दिनों रायगढ़ कांग्रेस जिला अध्यक्ष बनाने के लिए पर्यवेक्षक का दौरा भी रायगढ़ में चल रहा है जो हर ब्लाक में पहुंच कर एक एक कार्यकर्ताओं की इच्छा जानने का प्रयास कर रहे है लेकिन सबसे बड़ी आश्चर्य की बात यह है कि जिस जिंदल का विरोध युवा कांग्रेस कर रही है लैलूंगा विधायक कर रहीं है वहीं कांग्रेस के पर्यवेक्षक जिंदल के ही गेस्ट हाउस में आराम फरमा रहे है। अब भला यह कैसे संभव है कि एक तरफ आप जिंदल कंपनी का विरोध भी करते है और दूसरी तरफ उससे सुविधा लेने का उम्मीद भी रखते है यह तो तभी संभव है जब दिखावे का विरोध हो यानि सामने कुछ और पीठ पीछे कुछ और हो। एक कहावत बहुत मशहूर है राजनीति में सब संभव है इसका मतलब साफ है कि बड़े नेताओं को कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन किस पार्टी का है कि किस उद्योग से वहां की जनता त्रस्त है बड़े नेताओं को सिर्फ अपनी सुख सुविधा दिखाई देती है लेकिन इन सबमे दुश्मन बनते है तो छोटे छोटे जमीनी कार्यकर्ता क्योंकि सामने खड़े होकर विरोध तो यही करते है।

कुछ दिन पहले रायगढ़ नगर निगम में सामान्य सभा का आयोजन चल रही थी जिसमें नगर निगम द्वारा निर्मित रपटा पुल का जिंदल के नामकरण कुछ शर्तों के साथ हुआ था जिसका पालन जिंदल के द्वारा नहीं किया गया ऐसे में नामकरण को निरस्त करने के मुद्दे में बहस चल रही थी जिसका विरोध कांग्रेस के पूर्व सभापति ही कर रहे थे। पूर्व सभापति जिंदल के पक्ष में दिखाई दे रहे थे।

सूत्रों की माने तो नवीन जिंदल भाजपा के नेता है और कांग्रेस के नेताओं को जिंदल के कर्मचारी खुश करने का प्रयास कर रहे है इसका मतलब साफ है कि सत्ता किसी की भी हो फायदा बड़े नेताओं एवं उद्योगपति का ही होगा।