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कुदरगढ़ धाम / चैत्र नवरात्र विशेष.....
कैपिटल छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क....
संवाददाता :- दीपक गुप्ता....
सूरजपुर :- चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है एसे में कुदरगढ़ देवी धाम में 15 दिनों तक मेले का आयोजन किया गया है। हर दिन दूर दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य का सूरजपुर जिला चारों ओर से ऊचें पहाड़ों और वनों की हरियाली घिरा हुआ है। यहां प्राकृतिक सौंदर्य के साथ कई प्राचीन धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं। जिनकी अलग-अलग कहानी और रोचक मान्यताएं हैं। इन्हीं जगहों में से एक कुदरगढ़ देवी धाम भी है। यहां एक हजार फीट से ज्यादा ऊंची पहाड़ी पर माँ बागेश्वरी विराजमान है। चैत्र नवरात्रि के मौके पर कुदरगढ़ में छत्तीसगढ़ ही नहीं अन्य प्रदेशों से भी लाखों की संख्या श्रद्धालु पहुंचते है और माँ बागेश्वरी के द्वार पर मत्था टेककर मन्नत मांगते है। मान्यता है कि माँ बागेश्वरी के दरबार में जो भक्त सच्चे हृदय से मन्नत मांगते हैं तो उसकी मांगी गई मुराद पूरी होती है। जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर ओडगी ब्लॉक के कुदरगढ़ गांव में 1500 फीट की ऊंची पहाड़ की चोटी पर मां बागेश्वरी का धाम है। माँ बागेश्वरी के दर्शन करने के लिए 955 सीढ़ियों को चढ़ना पड़ता है, तब माँ बागेश्वरी के दर्शन होते हैं। बता दें कि माँ बागेश्वरी के दर्शन करने और मन्नत मांगने छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, पंजाब, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों के श्रद्धालु भी कुदरगढ़ पहुंचते हैं। और 955 सीढ़ियों को चढ़ते हुए 1500 फीट की ऊंचाई पर पहुंचकर वट वृक्ष के नीचे विराजमान माँ बागेश्वर के सामने मत्था टेकते हैं। जहा श्रद्धालुओ के मांगी मुरादें पूरी होती है । प्रदेशों से लगभग एक लाख श्रद्धालु माँ बागेश्वरी धाम पहुंचते हैं. बता दें कि माँ बागेश्वरी के दरबार में पुरातन काल से ही बलि प्रथा भी प्रचलित है, अगर किसी श्रद्धालु द्वारा मानी मन्नत पूरी होती है तो वह खुशी से माँ बागेश्वरी के धाम में बकरे की बलि चढ़ाता है हर साल नवरात्रि के मौके पर माता के दरवाजे पर लगभग 50 हजार से ज्यादा बकरों की बलि दी जाती है। माँ कुदरगढ़ी ने इतनी शक्ति दी। चारों तरफ से हरे-भरे वनों और पहाड़ियों से घिरे माँ बागेश्वरी धाम में पहुंचने के बाद हर भक्त एक अलग ही ताजगी महसूस करता है। हर तरफ बंदरों की टोलियों नजर आती है, जिन्हें देखने के बाद मन उत्साहित हो जाता है। 1500 फीट ऊंची पहाड़ी पर चढ़ने और उतरने के दौरान सीढ़ियों के रास्ते में प्रकृति की शुद्ध हवा चलती रहती है। लगभग 955 सीढ़ियों चढ़ने के बाद होते हैं माता कुदरगढ़ी के दर्शन :- जहा माता कुदरगढ़ी विराजी हैं वहा लगभग 955 सिढ़ियाँ है जिसे चढ़ने के बाद ही श्रद्धालुओ को माता के दर्शन हो पाते हैं ।
इस धाम मे हजार से ज्यादा बकरों की दी जाती है बलि :- माँ बागेश्वरी के इस धाम में मनोकामना पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं द्वारा बकरे की बली दी जाती है इस धाम में चैत्र नवरात्रि के दौरान हजारों से भी ज्यादा बकरों की बली दी जाती है । कुदरगढ़ के ऊचें पहाड़ के में विराजी माँ बागेश्वरी की महिमा को लेकर मान्यता है कि यहां कोई भी श्रद्धालु सच्चे दिल से नौकरी, व्यापार, धन, दौलत, सुख, समृद्धि, शांति की मन्नत मांगता है तो माँ बागेश्वरी उनकी मुराद जरूर पूरी करती हैं। चैत्र नवरात्रि के अवसर पर माँ बागेश्वरी के दरबार में हर दिन 8 से 10 हजार श्रद्धालु पहुंचते हैं और मन्नत मांगते है। चैत्र नवरात्रि के नव दिन अलग-अलग प्रदेशों से लगभग एक लाख श्रद्धालु बागेश्वरी धाम पहुंचते हैं। बता दें माँ दरबार में बलि प्रथा भी चलती है। अगर किसी श्रद्धालु द्वारा मानी गई मन्नत पूरी होती तो वह खुशी से माँ बागेश्वरी के धाम मे बकरे की बली चढ़ता है ।
कुदरगढ़ धाम में 15 दिनों तक लगता है भव्य मेला :- कुदरगढ़ धाम में वैसे तो 12 महीने श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, किन्तु चैत्र नवरात्रि पर राम नवमी के अवसर में माँ के दरबार में 15 दिन का भव्य व विशाल मेला पूरे सरगुजा अंचल का सबसे विशाल व बड़ा मेला लगता है जहा कई समाजिक संगठनों द्वारा भोग भंडारे का भी आयोजन किया जाता हैं । वही कई राज्यों के श्रद्धालुओं के साथ छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से लोग यहां माँ के दरबार में पहुंचते हैं। ऐसी मान्यताएं है की माता कुदरगढ़ी के दर्शन करने से लोगों की मनोकामनाएं माँ अवश्य पूर्ण करती हैं। लगभग तीन किमी की परिधि में लगने वाले मेले में प्रतिदिन लाखों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। मिली जानकारी के मुताबिक नवरात्रि के मौके पर माता के दरवाजे पर लगभग 50 हजार से ज्यादा बकरों की बलि दी जाती है। अब चैत्र नवरात्रि को शुरूआत हो चुकी है। ऐसे में कुदरगढ़ देवी धाम में 15 दिनों तक मेले का आयोजन किया गया है। हर दिन दूर-दूर से श्रद्धाल माता के दर्शन, पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। कुदरगढ़ लोक न्यास ट्रस्ट द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पानी, भोजन, ठहरने श्रद्धालुओं के लिए पानी, भोज की व्यवस्था भी की गई है । जिसका श्रद्धालु लाभ उठा भी रहे हैं ।