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मार्च 2024 में भैयाथान इलाके के 455 किसानों की फसल हुई थी बर्बाद और इलाके के 172 घरों को हुआ था नुकसान....
कैपिटल छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क....
संवाददाता :- दीपक गुप्ता...✍️
सूरजपुर / भैयाथान :- भैयाथान इलाके के दस गांवों में चार महीने पहले ओलावृष्टि और तूफान की वजह से किसानों की खेती से लेकर घर बर्बाद हुए थे। लेकिन अभी तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला है। मुआवजे का रिपोर्ट सामने आने के बाद किसान चिंतित हैं। इसे इस तरह से समझ सकते हैं कि किसी किसान का दो बार घर उजड़ गया, दो एकड़ में लगी गेहूं की फसल चौपट हो गई थी और मुआवजा 1377 रुपए मिलेगा। ये एक किसान की समस्या नहीं है। यही हाल अधिकतर किसानों का है। रिपोर्ट सामने आने के बाद किसान विरोध जता रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। अधिकारी नियम कानून का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ रहे है। हद तो यह कि नुकसान के बाद राजनीतिक लाभ लेने वाले जनप्रतिनिधियों को भी किसानों की समस्या से कोई सरोकार नहीं रह गया है। जिले के भैयाथान ब्लॉक में कई किसान ऐसे हैं, जिनका घर आंधी के कारण तबाह हो गया था। कर्ज लेकर पुनः निर्माण कार्य शुरू किया, लेकिन पूरा घर नहीं बन सका। एक सप्ताह बाद फिर से आंधी ने जबरदस्त नुकसान पहुंचाया। इस वजह से अब कुछ किसान अपने रिश्तेदारों के यहां पनाह लिए हुए हैं। किसानों के विरोध - प्रदर्शन के बाद अधिकारियों ने आनन - फानन में मुआवजा देने के लिए रिपोर्ट बनाई !
पीड़ित किसानों को मुआवजा का इंतजार :- मार्च 2024 के पहले सप्ताह में आंधी व ओलावृष्टि से गंगौटी, डबरीपारा, बांसापारा, बंजा, जूर, बीरमताल, नवापारा, बड़सरा, करौंदामुद्धा सहित दर्जनों ग्राम पंचायत में नुकसान हुआ है। अब इन्हें मुआवजे का इंतजार है। किसानों ने दो फसल ली, लेकिन मुआवजा सिर्फ एक का ही मिलेगा ब्याज पर पैसा लेकर खेती गंगौटी पंचायत के टीमल सिंह ने लगभग 10 हेक्टेयर में गेहूं, मटर, चना, धान, सरसों, तीसी और उड़द की खेती की थी। पूरी खेती में तीन लाख की लागत लगी थी। मार्च में हुई ओलावृष्टि से पूरी फसल बर्बाद हो गई। अब चार महीने बाद मुआवजा देने वाले लिस्ट में 20 हजार रुपए मिलना बताया गया है। मुआवजा कब तक मिलेगा इसका भी कुछ पता नहीं है ।
करौन्दामुड़ा निवासी महेंद्र राम पिता छतर राम के घर का सीट आंधी में उड़कर टूट करीब तीन दिन बाद तहसीलदार के पास पूरा दस्तावेज जमा किया, लेकिन एक महीने बाद भी मुआवजा नहीं मिला। बाद में कर्ज लेकर मिट्टी का दीवार बचाने सीट लगाने लगे। तभी फिर से दोबारा आंधी आई और उसमें भी उनके घर का सीट और दीवार टूट गया। अब तक मुआवजा नहीं मिला। इस वजह से अब वे दूसरे के घर में रहते हैं। मुआवजा वितरण में लेटलतीफी से किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। चार महीने से ऊपर होने को है और अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। मुआवजा नहीं मिल पाने की वजह से किसान खेती के लिए खाद-बीज नहीं ले पा रहे हैं। गंगौटी के सरपंच टीमल सिंह ने बताया कि सरकार को जितना भी पैसा देना है, जल्दी दे देती तो सहुलियत होती। किसान ब्याज पर पैसा लेकर खेती करने को मजबूर हैं। ग्राम बांसापारा के रामगोपाल पिता जयलाल ने एक एकड़ में उड़द और डेढ़ एकड़ में गेहूं की फसल लगाई थी। आंधी और ओलावृष्टि में फसल बर्बाद हो गई। रामगोपाल को सिर्फ उड़द की क्षतिपूर्ति ही दी गई। बर्बाद हुए गेहूं का एक रुपए मुआवजा भी नहीं मिला। इससे वे परेशान हैं। लागत का एक चौथाई मुआवजा तक नहीं मिलेगा, शिकायत के बाद आनन - फानन में अधिकारियों ने इलाके का मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग फसलों का मुआवजा तैयार नहीं कर सभी फसलों का किसानों के नाम पर ही ड्राफ्ट तैयार किया। हालत ये है कि किसानों को लागत का एक चौथाई भी मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। बांसापारा के किसान नंदकुमार ने दो हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई थी। उनकी सारी फसल बर्बाद हो गई और उन्हें सिर्फ 1377 रुपए मुआवजा मिलेगा। इससे वे नाराज हैं। मुआवजे के लिए जो रिपोर्ट तैयार की गई है, उसमें भैयाथान के ग्राम पंचायत बांसापारा, डबरीपारा, गंगोटी के साथ दूसरे गांवों में 455 किसानों की अलग-अलग फसल बर्बाद हुई हैं। वहीं, आंधी के कारण 172 लोगों के घरों को भी नुकसान पहुंचा है, लेकिन किसी को मुआवजा नहीं मिला है। जबकि मुआवजे के लिए ट्रेजरी विभाग से 10 लाख रुपए पहले ही मंगवा लिए थे। पत्रकारों द्वारा मुआवजा वितरण में खानापूर्ति के सवाल पुछे जाने पर भैयाथान के एसडीएम सागर सिंह राज ने बताया कि प्राकृतिक आपदा से नुकसान हुए फसल व मकान की क्षतिपूर्ति राशि किसानों के खाते में डाली जा रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा कराने पर पूरी लागत मिलती है। प्राकृतिक आपदा के तहत आंशिक सहायता देने का प्रावधान है, जो दिया जा रहा है। जल्द ही किसानों के खाते में पैसे डाले जाएंगे।
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