योजना बनाकर मित्रों के साथ कान्हा करते थे गोपियों के घर माखन की चोरी :- पुज्या शीघ्रता त्रिपाठी....

बृज के गली गली मे शोर देखो आयों नंद किशोर प्रसंग मे जमकर झुमे श्रोतागण...

कैपिटल छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क

 संवाददाता :- दीपक गुप्ता...✍️

 सूरजपुर :- जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम बड़सरा मे चल रहे सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के पंचम दिवस को भगवान श्री कृष्ण के माखन चोरी की लीला तथा गोर्वधन गोवर्धन पूजन बड़े ही धुमधाम से मनाया गया भगवान श्री कृष्ण के लीलाओं का वर्णन करते हुऐ कथा व्यास पुज्या शीघ्रता त्रिपाठी ने श्रोताओं को बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलाधार वर्षा से बचाने के लिए सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली पर उठाकर रखा और गोप-गोपिकाएं उसकी छाया में सुखपूर्वक रहे। भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन को नीचे रखा और हर वर्ष गोवर्धन पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने की आज्ञा दी। तभी से यह उत्सव अन्नकूट के नाम से मनाया जाने लगा। इसके बाद पुज्या शीघ्रता त्रिपाठी ने श्रीकृष्ण भगवान के माखन चोरी की कथा सुनाई। कथा सुनकर श्रोतागण भाव विभोर हो गए। श्री कृष्ण की माखन चोरी के लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जब श्रीकृष्ण भगवान पहली बार घर से बाहर निकले तो उनकी बृज से बाहर मित्र मंडली बन गई। सभी मित्र मिलकर रोजाना माखन चोरी करने जाते थे। सब बैठकर पहले योजना बनाते कि किस गोपी के घर माखन की चोरी करनी है। श्रीकृष्ण माखन लेकर बाहर आ जाते और सभी मित्रों के साथ बांटकर खाते थे। भगवान बोले कि जिसके यहां चोरी की हो उसके द्वार पर बैठकर माखन खाने में आनंद आता है। माखन चोरी की लीला का बखान करते हुए उन्होंने भगवान कृष्ण के बाल रूप का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण बचपन में नटखट थे।

धुमधाम से की गई गोवर्धन महाराज की पूजा :- भगवान कृष्ण कन्हैया बाल अवस्था में गोपियों के घर जा जा कर माखन चोरी करने बाद इसके अपने मईया यशोदा को सच न बताने के नाटकीय प्रदर्शन के बाद गोवर्धन महाराज की धुमधाम से पूजा अर्चना की गई ।

बृज के गली गली मे शोर देखो आयों नंद किशोर :- भगवान श्री कृष्ण के बाल लीलाओं के बीच बृज के गीत गली - गली मे शोर देखों आयों नंद किशोर की संगीतम धुन ने श्रोताओं का मन मोह लिया ।  लीलाधर कान्हा के माखन चोरी के लीलाओं को जैसे ही संगीत के माध्यम से प्रसारित किया गया वैसे श्रोताओं मे भक्ति का रक्त संचार हो उठा उपस्थित जन भावविभोर हो कर झुमने लगे । वही आज पंचम दिवस के कथा को श्रवण करने भारी संख्या मे श्रोतागण पहुचे थे ।