शिव अदभुत रुप बनाये ब्याह रचाने आये - कथा व्यास पं. रविन्द्र दुबे...

Dec 4, 2024 - 21:53
Dec 5, 2024 - 08:02
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 9 दिवसीय श्री राम कथा विशेष....

धुमधाम से संपन्न हुआ भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह.... 

कैपिटल छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क...

 संवाददाता : - दीपक गुप्ता...✍️

 सूरजपुर :- जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम बड़सरा चल रहे 9 दिवसीय श्री राम कथा के दुसरे दिन बड़ी धुमधाम से भगवान शिव व माता पार्वती का विवाह उत्सव मनाया गया । वहीं गाँव की दो बेटियाँ कु. प्रज्ञा जायसवाल ने भगवान शिव व आकृति गुप्ता ने माता पार्वती का किरदार निभाया । कथा श्रोताओं के साथ साथ उपस्थित जनों ने ईश्वर रुपी दोनों कन्याओं की आरती उतार कर हर्षोल्लास के साथ भगवान शिव व माता पार्वती का विवाह उत्सव मनाया

भगवान शिव के विवाह का वर्णन करते हुऐ कथा व्यास ने श्रोताओं को बताया की भगवान शिव ने सबसे पहले माता सती से विवाह किया था भगवान शिव का यह विवाह बड़ी जटिल परिस्थितियों में हुआ था सती के पिता दक्ष भगवान शिव से अपने पुत्री का विवाह नहीं करना चाहते थे लेकिन ब्रह्मा जी के कहने पर यह विवाह संपन्न हो गया एक दिन राजा दक्ष ने भगवान शिव का अपमान कर दिया जिससे नाराज होकर माता सती ने यज्ञ में कूदकर आत्मदाह कर ली इस घटना के बाद भगवान शिव तपस्या में लीन हो गए उधर माता सती ने हिमवान के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया कथा व्यास ने कथा सार को आगे बढाते हुऐ बताया कि तारकासुर नाम के एक असुर का उस समय बहुत आतंक था देवता गण उससे भयभीत थे तारकासुर को वरदान प्राप्त था कि उसका वध सिर्फ भगवान शिव की संतान ही कर सकती है उस समय भी भगवान शिव अपनी तपस्या में लीन थे तब सभी देवताओं ने मिलकर शिव और पार्वती के विवाह की योजना बनाई भगवान शिव की तपस्या को भंग करने के लिए कामदेव को भेजा गया लेकिन वह भस्म हो गए देवताओं की विनती पर भगवान शिव पार्वती जी से विवाह करने के लिए राजी हुए ।

शिव अदभुत रुप बनाये ब्याह रचाने आये :- कथा व्यास पं. रविन्द्र दुबे ने श्रोताओं को आगे बताया कि उस युग मे स्वान (कुत्ते) की कोई पुछ - परख नही थी तो उनके टोली ने अपने अपमानित होने की शिकायत भगवान शिव से की तो उन्होंने कहा कि मेरे बारात में सबसे आगे तुम्हारी टोली ही नाचते गाते जायेगी भगवान शिव - पार्वती के विवाह का वर्णन करते हुऐ कथा व्यास ने बताया कि विवाह की बात तय होने के बाद भगवान शिव की बारात की तैयार हुई इस बारात में देवता, दानव, गण, जानवर सभी लोग शामिल हुए भगवान शिव की बारात में भूत पिशाच भी पहुंचे ऐसी बारात को देखकर पार्वती जी की मां बहुत डर गईं और उन्होंने कहा कि वे ऐसे वर को अपनी पुत्री को नहीं सौंप सकती हैं. तब देवताओं ने भगवान शिव को परंपरा के अनुसार तैयार किया, सुंदर तरीके से श्रृंगार किया इसके बाद दोनों का विवाह सम्पन्न हुआ । वहीं कथा मे मुख्य कथा श्रोताओं मे सपत्नीक बिजेंद्र प्रसाद साहू , रामहित साहू , भोला राम यादव , शालिक राम साहू , रामलाल यादव , झारखंडे साहू , जगनारायण साहू , छांगुर प्रसाद साहू , विशुन राम यादव , रामजतन साहू , कृपाशंकर यादव व रामनंदे साहू रहे वही विशेष एकल कथा श्रोताओं मे किरण गोस्वामी , गुलाब कुंवर , यशोदिया पाण्डेय , कमला देवी , सरस्वती गोस्वामी , पार्वती गोस्वामी , फुलमती यादव , बसंती यादव , रुकमनिया यादव , हिरोंदिया सिंह , शांति गोस्वामी , महेशिया यादव , जगमन बाई , फुलमत चक्रधारी , सोनमत साहू , सोनमती यादव , सहोद्री यादव व फुलबसिया साहू रहीं तथा कथा विश्राम के पश्चात प्रसाद व भोग भंडारा का वितरण किया गया ।

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