विधायक एवं वित्त मंत्री, और सांसदों के नाम आमंत्रण पत्र में, लेकिन कार्यक्रम में नहीं दिखे; महापौर का नाम गायब, फिर भी पूरे समय रहे मौजूद!
रायगढ़ भाजपा के आमंत्रण पत्र पर सवाल: बड़े नेताओं के नाम शामिल, कार्यक्रम से रहे नदारद!
रायगढ़। भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय में आयोजित अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला स्तरीय परिचयात्मक बैठक एवं स्वागत समारोह का आमंत्रण पत्र अब चर्चा का विषय बन गया है। आमंत्रण पत्र में प्रदेश के वित्त मंत्री रायगढ़ विधायक, लोकसभा सांसद और राज्यसभा सांसद सहित कई वरिष्ठ नेताओं के नाम प्रमुखता से शामिल किए गए थे। लेकिन कार्यक्रम में इन नेताओं की उपस्थिति नहीं होने की बात सामने आई है।
वहीं, दूसरी ओर रायगढ़ नगर निगम के प्रथम नागरिक महापौर का नाम आमंत्रण पत्र में शामिल नहीं था, जबकि वे पूरे कार्यक्रम में उपस्थित रहे। इस स्थिति ने आमंत्रण पत्र तैयार करने की प्रक्रिया और संगठनात्मक समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिनके नाम आमंत्रण पत्र में, वे कार्यक्रम से नदारद क्यों?
आमंत्रण पत्र में रायगढ़ विधायक एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी, लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया और राज्यसभा सांसद कुमार देवेंद्र प्रताप सिंह सहित कई प्रमुख नेताओं के नाम दर्ज हैं। आमंत्रण पत्र में इन नेताओं को मुख्य अतिथि एवं सम्माननीय अतिथियों की सूची में स्थान दिया गया था।
लेकिन यदि आमंत्रण पत्र में शामिल प्रमुख जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में उपस्थित नहीं थे, तो सवाल उठता है कि क्या उनकी अनुपस्थिति पहले से तय थी? यदि ऐसा था, तो आमंत्रण पत्र में उनके नाम शामिल करने का आधार क्या था? क्या आमंत्रण पत्र जारी करने से पहले संबंधित नेताओं की उपस्थिति की पुष्टि की गई थी?
महापौर मौजूद, लेकिन आमंत्रण पत्र से नाम गायब!
इस पूरे मामले में दूसरा सवाल रायगढ़ नगर निगम के महापौर को लेकर उठ रहा है। शहर के प्रथम नागरिक कार्यक्रम में पूरे समय मौजूद रहे, लेकिन आमंत्रण पत्र में उनका नाम शामिल नहीं किया गया।
क्या यह महज आमंत्रण पत्र तैयार करने में हुई चूक थी या संगठन के भीतर समन्वय की कमी का मामला है? फिलहाल, इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
कहीं संगठनात्मक मतभेद तो नहीं?
भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के इस कार्यक्रम में आमंत्रण पत्र और वास्तविक उपस्थिति को लेकर सामने आई स्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल व्यवस्थागत चूक थी या इसके पीछे कोई अन्य संगठनात्मक कारण है?
हालांकि, इस मामले में गुटबाजी या किसी आंतरिक विवाद की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में संगठन का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
अब देखने वाली बात यह है कि भाजपा संगठन इन सवालों पर क्या जवाब देता है। आखिर आमंत्रण पत्र में बड़े नेताओं के नाम शामिल करने के बावजूद उनकी अनुपस्थिति और कार्यक्रम में मौजूद महापौर का नाम न होने के पीछे वास्तविक कारण क्या था?