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कांग्रेस शासन में गोठान भाजपा शासन में अभ्यारण योजना महज नेताओं और अधिकारियों के अतिरिक्त आय का बना हुआ है जरिया ...
मवेशी सड़कों पर और किसानों के खेतों में... !!! क्या प्रदेश की सरकार के पास इस समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने का है जज्बा....?
संवाददाता :- दीपक गुप्ता...✍️
कैपिटल छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क...
सूरजपुर ! एक ओर जहा मानसून ने दस्तक दे दी है बाद इसके जिले के किसान खेती - किसानी मे जुट गए हैं तो वही आवारा मवेशियों ने भी उत्पात मचाना शुरु कर दिया है इन दिनों किसान खेती के कार्य मे जुट गये है तो वही आवारा मवेशी किसानों के द्वारा खेतों बोयें धान सहित उड़द , मक्का व अन्य फसलों को चट कर जा रहे हैं जिसमे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है ।
आवारा मवेशी दिन मे फसलों को कर रहे नुकसान रातों मे सड़कों पर कर रहे विचरण :- जहा एक ओर आवारा मवेशी दिन मे किसानों के फसल को नुकसान पहुचा रहे हैं तो वहीं शाम ढलते ही सड़क , चौक - चौराहे पर विचरण करते नजर आ रहे हैं । जिस कारण आये दिन वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो रहें हैं जानकार बताते हैं कि पुर्वातर काग्रेंस शासन में गोठान और वर्तमान के भाजपा शासन में अभ्यारण्य योजना महज नेताओं और अधिकारियों के अतरिक्त आय का जरिया बना हुआ है इधर आवारा मवेशी किसानों के फसलों को नुकसान पहुचा रहे हैं तो वही दुसरी ओर आवारा मवेशियों के कारण सड़क दुर्घटनाओं लगातार इजाफा हो रहा है । और वर्तमान के भाजपा शासन मे बने अभ्यारण्य योजना महज कागजों मे सिमट कर रह गया है । जिसका लाभ फिलहाल किसानों को मिलता नजर नही आ रहा ।
आवारा मवेशियों का कारण उठानी पड़ रही आर्थिक क्षति :- ग्रामीण क्षेत्र के किसानों का कहना है कि पशु पालक अपने - अपने मवेशियों को गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले ही खुला छोड देते हैं । बाद मे मवेशी मालिकों द्वारा इंकार कर दिया जाता है कि उनके मवेशी हैं मवेशी मालिकों को कांजी हाऊस का भय इसलिए भी नही है क्योंकि उसका नियमित संचालन नही हो रहा इस कारण खेती - बाड़ी करने के समय बरसात मे भी आवारा मवेशियों का विचरण बदस्तूर जारी रहता है परिणामस्वरूप आवारा मवेशी फसलों को नुकसान पहुचा रहे हैं जिस कारण किसानों को आर्थिक क्षति हो रही हैं । जिसे लेकर किसान काफी दुखी व चिंतित हैं किसानों ने शासन - प्रशासन से इस गंभीर समस्या से निजात दिलाने की मांग की है ताकि खेती के लिये तय समय सीमा के भीतर निश्चिंत होकर किसान खेती कर सकें ।