अमलीभौना के कोटवारी भूमी की रजिस्ट्री का खेल....
रायगढ़ - रायगढ़ जिले में जब से उद्योगपतियों की नजर पड़ी है तब से जमीन की हेराफेरी के मामलों में लगातार बढ़ोत्तरी होती जा रही है और हो भी क्यों न कहते है पैसों में बहुत दम होता है और इसका उदाहरण के तौर पर ताजा मामला हम अमलीभौना का देख भी रहे है जहां कोटवारी भूमि की रजिस्ट्री बेखौफ तरीके से कर दी वही है वही इन जमीनों के नामांतरण की जानकारी भी मिल रही है।
नियमों पर अगर ध्यान दिया जाए तो कोटवारी भूमि की खरीदी बिक्री नहीं की जा सकती लेकिन यह रायगढ़ है साहब यहां पैसों के दम पर अब जायज है और यही हो भी रहा है अमलीभौना की कोटवारी भूमि की खरीदी बिक्री हो गई सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि इस भूमि का नामांतरण होने कि भी जानकारी निकल कर सामने आ रही है अब सवाल यह उठता है कि क्या कोटवारी भूमि की जानकारी इस क्षेत्र के पटवारी को थी या नहीं और अगर थी तो फिर उस जमीन के लिए बिक्री नकल कैसे जारी किया गया और जानकारी होने के बावजूद तहसीलदार साहब ने किसे दबाव में आकर नामांतरण की प्रक्रिया शुरू कर दिया।
सूत्रों की माने तो अमलीभौना के कोटवारी भूमि की खरीदी बिक्री एक कालोनाइजर के इशारे पर हुआ है और इस कालोनाइजर को कोटवारी भूमि की पूरी जानकारी थी और दस्तावेजों में राजस्व के अधिकारियों के साथ मिल कर षडयंत्र पूर्वक छेड़छाड़ करने के पश्चात वह कालोनाइजर इस कोटवारी भूमि को किसी अन्य व्यक्तियों को भी बेच दिया है। अब अगर वर्तमान में इस जमीन पर सरकार कार्यवाही करती है तो इसमें वही लोग फसेंगे जिनका नाम वर्तमान में दिखाई दे रहा है और लोग बच जाएंगे जिन्होंने पूरा षड्यंत्र रचा है।